श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

श्रीमद्भागवत कथा में सरकड़ा विश्नोई में वृहस्पतिवार को चतुर्थ दिवस में एटा से आयी हुई बाल व्यास कुमारी आकृति शास्त्री जी ने सती शिरोमणि माता अनुसूइया जी के चरित्र का वर्णन कर बताया कि स्त्रियों के सतीत्व में राई को पर्वत, ओर पर्वत को राई बनानें की शक्ति होती है। जैसे सती माता अनुसूइया जी ने अपने पतिव्रत धर्म से संसार के कर्ता-धर्ता “उत्पत्तिकर्ता- भगवान ब्रह्मा जी, पालनकर्ता- भगवान विष्णु जी, ओर संहारकर्ता भगवान शिव जी को 6-6 माह का बालक बना दिया था। इसी प्रकार से स्त्री का कर्त्तव्य होता है कि चरित्रवान बनें, प्रातःकाल पति से पहले उठना चाहिए, उनके शुभ दर्शन कर चरण स्पर्श करने चाहिए। रात्रि में पति के सो जाने के बाद ही सोना चाहिए। स्त्रियों में दूसरी स्त्रियों से ईर्ष्या करने का एक अवगुण भी पाया जाता है। स्त्रियों के लिए पतिव्रता धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। मानव को शुभ संस्कारों का कभी त्याग नहीं करना चाहिए, सदैव चित्त में भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। सत्य व धर्म मार्ग पर चलने वालों का कलयुग व यमराज कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते। इस अवसर पर जोत सिंह चौहान जी, अजय कुमार विश्नोई, रोहित विश्नोई, अनिल सैनी, कमल चौहान, दीवान चंद शर्मा, नमन विश्नोई, आरती विश्नोई, गरिमा विश्नोई, भूमिका विश्नोई करन सिंह सैनी, राम सिंह चौहान, दिनेश सैनी, नागेन्द्र चौहान, विनोद कश्यप,नारायण दास सैनी, उपासना कश्यप, चेतना विश्नोई, सपना कश्यप, आलोका विश्नोई(सोनी), पूनम विश्नोई मीना रानी, राजेश कुमारी विश्नोई आदि मौजूद रहे।

150 thoughts on “श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

Leave a Reply

Your email address will not be published.