पटना के 150 सौ साल पुराने इस मंदिर में शनिवार को लगती है भारी भीड़, मां खुद करती हैं सारे दुख दूर

दीपक कुमार, बिहार ब्यूरो, पटना:बिहार में शक्ति उपासना स्थलों में राजधानी पटना का दरभंगा हाउस काली मंदिर का अलग स्थान है। अशोक राजपथ में गंगा तट पर स्थित यह मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना है।

ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से जो भी भक्त यहां आकर माता की चरणों में शीश नवाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी मन्नत पूरी होती है। दरभंगा महाराज राजा कामेश्वर सिंह द्वारा निर्मित यह मंदिर इसीलिए भी खास है कि यहां आज भी बलि देने की परंपरा कायम है।

दशहरा में नवमी के दिन बलि दी जाती है। इसके अलावा अन्य दिनों पूजा के दौरान नारियल की बलि दी जाती है। हर शनिवार और मंगलवार को यहां हजारों श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। मंदिर के पहले पुजारी स्वर्गीय जटाधर झा थे। परंपरा के अनुसार अभी भी उनके वंशज दीनानाथ झा पुजारी हैं।

इस मंदिर को दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने बनवाया था। इस मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं। इस मंदिर में सबसे ज्यादा संख्या छात्रों की आती है। इसका एक बड़ा कारण यूनिवर्सिटी में इस मंदिर का होना है। छात्रों का विश्वास है कि मां उनकी हर बात पूरी करती हैं।
इसीलिए प्रतियोगी छात्र यहां आकर मां से अपनी मन्नत मांगते हैं। कहा जाता है कि ये मंदिर जागृत है और यहां माता शाश्वत मौजूद हैं। यहां शक्ति की उपासना भी होती है। नवरात्र में यहां तंत्र विद्या की सिद्धि के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

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