कॉल नहीं, अब अंडरवर्ल्ड भेजी रही हैं ऑडियो रिकॉर्डिंग

मुंबई : अंडरवर्ल्ड सरगनाओं ने धमकी देने और अपने पंटरों के साथ बात करने का नया तरीका निकाला है। अब वह कॉल्स कम करते हैं, ऑडियो रिकॉर्डिंग ज्यादा वॉटसऐप करते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पहले सरगनाओं और उनके पंटरों के बीच फोन पर सीधे वार्तालाप होती थी। पुलिस द्वारा कॉल टेप करने पर उनकी पूरी साजिश सामने आ जाती थी। अब सरगना विदेश से अपनी कुछ मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग भेज देते हैं। सामने वाला पंटर उस रिकॉर्डिंग को सुनता है और फिर अपना जवाब भी रिकॉर्डिंग करके वॉट्सऐप कर देता है। सट्टेबाज भी इसी तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं।
चूंकि अंडरवर्ल्ड सरगनाओं के वॉट्सऐप नंबर विदेश के होते हैं, मूल नाम के होते ही नहीं, इसलिए यदि गलती से नंबर का थोड़ा डिटेल मिल भी गया, तो यह ट्रेस करना बहुत मुश्किल होता है कि ऑडियो रिकॉर्डिंग किस सरगना की है और किस जगह से भारत में भेजी गई है? कुछ मामलों में सरगनाओं ने हफ्ता मांगने वालों को भी ऑडियो रिकॉर्डिंग भेजी है, पर सूत्रों का कहना है कि काफी लोगों ने पुलिस में शिकायत ना करना ही बेहतर समझा।
अंडरवर्ल्ड में प्रारंभ में लैंडलाइन से कॉल्स करने का प्रचलन था। उस वक्त में पीसीओ से किसी को भी धमकी भरे फोन कर दिए जाते थे। बाद में जब मोबाइल का युग आया, तब इससे हफ्ते के फोन किए जाने लगे। बाद में अंडरवर्ल्ड ने इंटरनेट कॉलिंग से वार्तालाप शुरू की। वीआईपी कॉल्स अभी भी बहुत की जाती हैं। सेटेलाइट और स्काइप से भी दर्जनों शूटआउट्स की साजिश रची गईं। कई मर्डर में लंदन के ऐसे इंटरनैशनल सिम कार्ड यूज किए गए, जिसमें इनकमिंग तो फ्री में होती है, पर ऑउटगोइंग के प्रति मिनट कई सौ रुपये लगते थे। ऐसे कार्ड इसलिए ज्यादा खरीदे गए, क्योंकि इनमें किसी तरह के दस्तावेजों की जरूरत नहीं होती थी। ऐसे कार्ड दुबई में मिलते थे। इस अधिकारी के अनुसार, शायद वहां अभी भी मिलते हैं।

इस अधिकारी का कहना है कि सिम कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने की वजह से उम्मीद है अगले कुछ महीनों में भारत में फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड खरीदने पर बहुत हद तक कंट्रोल लगेगा, पर विदेश से जिन वॉट्सऐप नंबरों से किसी वारदात की साजिश के तहत ऑडियो रिकॉर्डिंग भेजी जा रही है, उन सिम कार्ड्स की पहचान करना और उनकी बिक्री पर रोक लगाना भारतीय जांच एजेंसियों के हाथ में नहीं है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि भारत में सिर्फ नक्सली ही हैं, जो अभी भी फोन, मोबाइल, इंटरनेट, ई-मेल का उपयोग नहीं करते। वे सिर्फ कागजों पर अपना संदेश लिखते हैं और मूल स्थान पर यह संदेश भिजवाने के लिए कम से कम एक दर्जन अपने साथियों की मदद लेते हैं। इसलिए कोई भी जांच एजेंसी उनकी साजिश को भांप ही नहीं पाती।

14 thoughts on “कॉल नहीं, अब अंडरवर्ल्ड भेजी रही हैं ऑडियो रिकॉर्डिंग

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