कासगंज हिंसा: सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर ने फोड़ा ‘फेसबुक बम’, मचा बवाल

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के कासगंज में गणतंत्र दिवस के मौके पर विश्व हिंदू परिषद और एबीवीपी की मोटर साइकिल रैली पर हुई पत्थरबाजी के बाद झड़प में 16 वर्षीय एक युवक की मौत हो गई थी.

इस घटना के बाद भड़की हिंसा पर बयानबाजी थमने के बजाए बढ़ती जा रही है. बरेली के डीएम के बयान के बाद अब सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण के फेसबुक पोस्ट ने बवाल खड़ा कर दिया है. हालांकि इस फेसबुक पोस्ट को हटा लिया है. रश्मि वरुण ने कासगंज हिंसा में मारे गए चंदन गुप्ता की मौत का जिम्मेदार भगवा को ठहराया है.

रश्मि वरुण ने कासगंज हिंसा की तुलना सहारनपुर के मामले से करते हुए फेसबुक पर अपने मन की बात लिख डाली जिसके बाद बवाल खड़ा हो गया.

डिप्टी डायरेक्टर ने अपने पोस्ट में लिखा

‘..तो ये थी कासगंज की तिरंगा रैली. कोई नहीं बात नहीं है ये, अम्बेडकरजयंती पर सहारनपुर सड़क दुधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी जिसमे अम्बेडकर गायब थे, या कहिये भगवा रंग में विलीन हो गए थे. कासगंज में वही हुआ. जो लड़का मारा गया उसे किसी दूसरे तीसरे समुदाय ने नहीं मारा उसे केसरी,सफ़ेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा. जो नहीं बताया जा रहा वो ये है कि अब्दुल हमीद कि मूर्ती या तस्वीर पर तिरंगा फहराने की बजाए इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गयी और केसरिया, सफ़ेद,हरे और भगवा रंग पर लाल रंग भारी पड़ गया.’

वहीं, बरेली डीएम के पोस्ट का डिप्टी डायरेक्टर ने समर्थन किया.

फेसबुक पोस्ट पर डिप्टी डायरेक्टर ने बरेली डीएम का समर्थन किया है. इमोजी के साथ डिप्टी डायरेक्टर ने लिखा है कि पाकिस्तान में जाकर नारे लगाकर मरना है क्या इन्हें. बरेली डीएम आर. विक्रम सिंह द्वारा अपना स्पष्टीकरण देते हुए फेसबुक पर की गई टिप्पणी को शेयर करते हुए भी रश्मि ने लिखा है कि देखिए सही बात को किस तरह अपना स्पष्टीकरण देना पड़ता है. सही इंसान को भी माफी मांगनी पड़ती है.

सब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का खेल

कासगंज हिंसा को लेकर डिप्टी डायरेक्टर ने सिर्फ एक पोस्ट नहीं बल्कि कई पोस्ट किये. उन्होंने लिखा, ‘न पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे और न तथाकथित तिरंगा यात्रा रोकी गई. ये सब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का खेल है.’

डिप्टी डायरेक्टर ने दी सफाई

इस पोस्ट के बाद विवाद उठने पर रश्मि वरुण ने सफाई देते हुए कहा कि उनके पोस्ट में ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई है जो किसी के खिलाफ हो. मेरा कहने का सिर्फ इतना मतलब है कि गड्तंत्र दिवस मनाने का सबको अधिकार है.

इसे पहले या बाद में मनाने का कोई मतबल नहीं है. मुझे पता लगा ही कि 26 जनवरी को कासगंज में दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ था. अगर व्हाट्सएप पर कोई गलत संदेश जाता है तो वे रुकने के बजाए वायरल हो जाता है. इससे माहौल बिगड़ने के हालत पैदा हो जाते है.

सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर ने कासगंज हिंसा के दौरान मारे गए चंदन गुप्ता की मौत का जिम्मेदार भगवा रंग को ठहराया है.

क्या है मामला?

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस पर समुदाय विशेष के लोगों ने एबीवीपी-विश्व हिंदू परिषद की तिरंगा यात्रा पर पथराव कर दिया था जिससे पूरे शहर में बवाल हो गया था. यात्रा पर जमकर फायरिंग और पथराव के साथ आगजनी की कोशिश की गई. इस दौरान गोली लगने से एक युवक चंदन गुप्ता की मौत हो गई थी. चंदन की मौत के बाद कासगंज में हिंसा भड़क उठी थी.

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