हरिकथा ज्ञान यज्ञ का तृतीय दिवस

डिलारी क्षेत्र के ग्राम सरकड़ा विश्नोई में श्री जाम्भाणी हरिकथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर हरिद्वार से पधारे हुए संत श्री राजेन्द्रानन्द जी महाराज जी ने बताया कि गुरु जम्भेश्वर जी हमें 29 नियमों पर चलने का उपदेश दिया है। गुरु जम्भेश्वर जी भगवान विष्णु के अवतार है, उन्होने दया ओर धर्म की स्थापना के लिए ही अवतार धारण किया था। सात वर्ष तक अलौकिक बाल लीला की, तथा सात वर्ष की अवस्था में मौन भंग किया, 27 वर्षों तक गौ सेवा की, संवत् 1515 में भादवा वदि अष्टमी के दिन प्रथम शब्द का उच्चारण किया, जो गुरु महिमा से युक्त है। ओ3म् गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह पुरोहित, गुरुमुख धर्म बखांणी। अर्थात् गुरु जम्भेश्वर जी कहते हैं कि हे संसार के लोगों! आप सभी सदा सर्वदा ही यदि अपना कल्याण चाहते हैं तो उस परमसत्ता परमेश्वर ओ3म् नामी गुरु को पहचानों। क्योंकि गुरुमुख से निकला हुआ वचन सदाधर्म की ओर ले जाने वाला ही होगा। अन्न सदा शुद्ध ही गृहण करना चाहिए, क्योंकि अन्न से मन का सीधा संबंध होता है। जैसा खाओ अन्न, वैसा होगा मन। धर्म के मार्ग पर चलना भी तप होता है। इस अवसर पर संत श्री चमन ऋषि जी, संत श्री सुखदेव महाराज जी, संत श्री विशम्बरानंद जी, स्वामी सरवन दास जी, संत श्री गोविंद शरणम् महाराज जी, गांव व क्षेत्र के सम्मानित लोगों ने भी कथा का पान किया। इनमें सरपंच श्री पवन कुमार विश्नोई, उपसरपंच श्री ज्ञानेन्द्र प्रकाश जी, कुलदीप विश्नोई, सुशील विश्नोई, सुरेश चंद्र आर्य नकुल विश्नोई, विमल कुमार विश्नोई एडवोकेट आदि उपस्थित रहे।

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