हरियाणा जाट आंदोलन के पीड़ितों का सही दर्द बयां करती “चीरहरण”

विवेक अरोड़ा: राइटर-डायरेक्टर कुलदीप रुहिल की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘चीरहरण’ पिछले साल फरवरी में हरियाणा में हुए जाट आंदोलन के पीड़ितों का सही दर्द बयां करती है, जिसे पूरी दुनिया में वाहवाही मिली है। इस फिल्म का अनावरण करने के लिए इसकी टीम दिल्ली में थी, जहां लोगों ने इसे भरपूर सराहा और एक बेहतरीन फिल्म बनाने के लिए खड़े होकर इस फिल्म की टीम का अभिवादन किया। स्वाभाविक तौर ऐसे रेस्पॉन्स से टीम काफी प्रफुल्लित नजर आई। टीम ने पूरी दिल्ली में कई जगह इस फिल्म का प्रमोशन एवं अनावरण किया।

यह फिल्म राइटर-डायरेक्टर कुलदीप रुहिल की दिमाग की उपज है। वह कहते हैं कि मैं खुद हरियाणा से हूं। मैंने जब आरक्षण आंदोलन के हिंसक हो जाने संबंधी खबर टीवी पर देखी, तो मुझे ऐसा लगा, जैसे हरियाणा द्रौपदी बन गया हो। हर तरफ तबाही का मंजर था। सब बस मूकदर्शक बनकर देख रहे थे, कोई कुछ नहीं कर पा रहा था। कहीं से कोई मदद नहीं मिल पा रही थी, मुझे बहुत धक्का लगा कि आखिर ये क्या हो रहा है और क्यूं हो रहा है। ऐसे में मैंने सारी सच्चाई को पर्दे पर लाने का निश्चय किया, जिसका रिजल्ट ‘चीरहरण’ है।

बता दें कि ‘चीरहरण’ का पहला प्रीमियर लंदन में हुआ था, जहां इसे काफी वाहवाही मिली थी। हालांकि प्रीमियर से पहले स्वाभाविक तौर पर राइटर-डायरेक्टर कुलदीप रुहिल काफी जिज्ञासु होने के साथ बेहद नर्वस भी थे, लेकिन आखिरकार संतोषजनक परिणाम ने तमाम अंदेशों को धो दिया। कुल नब्बे मिनट की यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म जाट आंदोलन के पीड़ितों एवं उसके भुक्तभोगियों की जीवंत दास्तान है। ट्विस्टर एंटरटेनमेंट निर्मित इस फिल्म का शीर्षक भी महाभारत के ‘चीरहरण’ से न केवल प्रेरित है, बल्कि जाट आंदोलन के दौरान जो कुछ हुआ, उसे सौ फीसदी चरितार्थ भी करता है। फिल्म को जल्द रिलीज करने की योजना है।

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