इंग्लैंड से पढ़कर लौटी नफीसा गांव में कर रही ऐसा काम, आप भी करेंगे सेल्यूट

इंग्लैंड से पढ़ाई कर रही मुंबई की एक लड़की ने वो कर दिखाया, जिसे सरकार को करना चाहिए. लेकिन सरकार नींद में सो रही थी. नफीसा लोखंडवाला ने ओडिशा के गजापति में मलेरिया से फाइट कर रही हैं.नफीसा ने मुंबई के सोफिया कॉलेज से मास मीडिया में ग्रेजुएशन किया और उसके बाद नौकरी करने लगी. लेकिन वो अपने काम से संतुष्ट नहीं थी. इसलिए उसने नौकरी छोड़ दी और ‘सुजाया फाउंडेशन’ और ‘प्रेरणा एंटी ट्रैफिकिंग’ में टीचर के तौर पर काम करना शुरू किया.

साल 2016 में नफीसा को अपने मन मुताबिक काम मिला. उन्होंने एसबीआई की यूथ फॉर इंडिया फैलोशिप के तहत ओडिशा के नक्सल प्रभावित जिले गजापति के कोइनपुर में काम शुरू किया. ये इलाका पूरी तरह से घने जंगलों से घिरा हुआ है. नफीसा ने पहले तीन महीने तक इस इलाके के बारे में जानकारी हासिल की. उन्होंने पाया कि इस इलाके में लोगों को मलेरिया और ट्यूबरक्लोसिस की बीमारी ज्यादे है.

जब नफीसा ने इसके बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि लोग इलाज के लिए अस्पताल नहीं जाते हैं. इस दौरान नफीसा को लोगों ने बात करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि वो उड़ीया भाषा बोलते थे और नफीसा हिंदी जानती थी.

इसके बाद नफीसा ने फैसला किया कि वो इन लोगों को मलेरिया जैसी बीमारियों से जागरूक करेंगी. इसके लिए नफीसा ने अपने डांसिंग स्किल का इस्तेमाल किया. वो बच्चों को डांस करना सिखाने लगी. नफिसा खुद एक ट्रेंड डांसर हैं. वो जैज फंक और स्ट्रीट जैज जैसे दूसरे डांस करती हैं नफीसा का मानना था कि लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिये कला से बेहतर और कोई दूसरा साधन हो नहीं सकता.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नफीसा कोइनपुर में ‘ग्राम विकास संस्था’ के लिए काम रही हैं. इस संगठन का इलाके में ‘महेंद्र तनाया आश्रम’ नाम से एक स्कूल चलता है. जहां पर नफीसा बच्चों के साथ जनवरी से काम कर रही हैं. नफीसा ने यहां के बच्चों के साथ मेलजोल बढ़ाने के लिए डांस को जरिया बनाने के बारे में सोचा. नफीसा ने बच्चों को काफी समझाया तो एक लड़का और 5 लड़कियां डांस सीखने के लिये तैयार हुए. इसके बाद इनकी संख्या बढ़ती गई.

इसके बाद नफीसा ने मलेरिया जैसी बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक किया. नफीसा ने अपने नाटक को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ दिया और बच्चों की मदद से नुक्कड़ नाटक करने लगी. बच्चों ने तुंबो और रायसिंगी गांव में नुक्कड़ नाटक किया. इसके बाद बच्चों के नाटक का मंचन बढ़ता चला गया और लोग जागरुक होने लगे.

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