गोल्डन रिकॉर्ड का होगा कमाल, एलियन भी देख सकेंगे ताजमहल

यदि अन्य ग्रहों में जीवन का कोई अस्तित्व है तो दुनिया में प्रेम की अमर मिसाल आगरा के ताजमहल को अन्य ग्रहों के लोग भी जान सकेगे. ताजमहल दुनिया के बेहतरीन नगीनों में एक है, यह बात साबित करती है करीब 39 साल पहले नासा द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए वॉयेजर-1 में लगे गोल्डन रिकॉर्ड में भेजी गयी तस्वीरें. नासा ने अंतरिक्ष में भेजे गए वॉयेजर-1 में एक गोल्डन रिकॉर्ड लगाया था, जिसमे 116 तस्वीरे जमा की थी और इन तस्वीरों में एक तस्वीर ताजमहल की भी है.

खास बात ये कि इसमें कोलकाता के ट्रैफिक जाम को भी जगह दी गई है . सड़क पर जाम और अन्य वाहनों के चलने से कोलकाता सालों से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कोलकाता को मरा हुआ शहर करार दिया था .

विश्व में दुनिया कि सबसे सुन्दरतम इमारतों में से एक ताजमहल का लोहा लोग कितना मानते है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नासा ने दूसरी दुनिया को पृथ्वी से परिचय करवाने के लिए दुनिया कि 116 चीजो में भारत में स्थित ताजमहल को जगह दी.

दरअसल, वॉयेजर को नासा ने जब लांच किया गया था, उस वक़्त का जमाना ग्रामोफोन था. वॉयेजर को अंतरिक्ष में बृहस्पति के साथ साथ शनि से गुजरते हुए पूरे सौरमंडल का सफर तय करना था, ऐसे में स्पेस मिशन्स के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने और वॉयेजर मिशन को पृथ्वी का दूत बना देने के लिए महान वैज्ञानिक डॉ. कार्ल सगान ने वॉयेजर-1 और वॉयेजर-2 स्पेसक्राफ्ट्स में सोने से बना एक खास एलपी रेकार्ड रखवाया जिसे गोल्डन रिकॉर्ड कहा गया. गोल्डन रेकार्ड को रखने का मकसद था कि अगर वॉयेजर स्पेसक्राफ्ट, अंतरिक्ष ने कभी भी किसी अनजान सभ्यता या फिर किसी अन्य ग्रह के लोगों जिसे एलियन कहा जाता है के संपर्क में आता है तो उन्हें पृथ्वी पर मौजूद जीवन के हजारों स्वरूपों और यहाँ कि संस्कृति के विषय में पता चल सके.

अंतरिक्ष में भेजे जा रहे वॉयेजर के साथ भेजे जा रहे गोल्डन रिकॉर्ड में किन किन चीजो को जगह दे जाए इसका चयन डॉ कार्ल ने खुद किया. डॉ और उनके साथियो ने पृथ्वी की करीब हर सभ्यता की सूचक के रूप में 116 ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन तस्वीरें जमा कीं. इनमें से कुछ तस्वीरें वैज्ञानिक महत्व की हैं, इनमें गणित और भौतिकी के फॉर्मूले, सौरमंडल और मानव डीएनए, गर्भ में बच्चे को सहेजे एक मां, दुनियाभर की 55 भाषाओं में सन्देश के साथ साथ भारत के ताजमहल को जगह दी.

जाने क्या क्या मुख्य था गोल्डन रिकॉर्ड में

मानव का डीएनए

गर्भ में बच्चे को सहेजे एक मां

दुनिया भर कि 55 भाषाओं में सन्देश (हिंदी समेत गुजराती, राजस्थानी, उर्दू, तमिल और कन्नड़ जैसी भारतीय भाषाएं भी शामिल)

एक पुरुष का रेखाचित्र

बच्चे को दूध पिलाती मां

खाते-पीते हुए लोग

कोलकाता में लगा ट्रैफिक जाम

ताजमहल

चीन की दीवार

सौरमंडल के विस्तार के सामने वॉयेजर का आकार काफी छोटा है, इसलिए इस बात की संभावना काफी कम है कि वॉयेजर की मुलाकात किसी अन्य सभ्यता से कभी होगी, और अगर ये मुलाकात होती है तो उस अनजान सभ्यता के लोग इस गोल्डेन रेकार्ड को प्ले करके पृथ्वी के जीवन और सांस्कृतिक विविधता की झलक पा सकेंगे .

कैसे लांच हुआ वॉयेजर मिशन

साल 1977 में नासा ने जुड़वा स्पेसक्राफ्ट में वॉयेजर-2 को पहले लांच किया. अंतरिक्ष में ग्रहों की अनोखी स्थिति को ध्यान में रखते हुए वॉयेजर-2 का प्रक्षेपण ऐसे खास कोण पर किया गया ताकि ये बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून तक पहुंच सके.

वॉयेजर-1 की लांचिंग इसके जुड़वा स्पेसक्राफ्ट के कुछ दिन बाद हुई, लेकिन इसका प्रक्षेपण पथ छोटा और तेज रखा गया, ताकि ये बृहस्पति और शनि पर वॉयेजर-2 से पहले पहुंच सके. वॉयेजर-1 को उच्च प्राथमिकता दी गई, क्योंकि इसे शनि के एक खास चंद्रमा टाइटन के भी बेहद करीब से गुजरकर उसके वायुमंडल का अध्ययन भी करना था. 19 दिसंबर 1977 को वॉयेजर-2 को पीछे छोड़ते हुए वॉयेजर-1 उससे आगे निकल गया. नासा के अनुसार, वॉयेजर-1 अब सौरमंडल के अंतिम छोर से भी आगे निकलकर पृथ्वी से 17 अरब 96 करोड़ किलोमीटर से भी दूर जा चुका है. गहन अंतरिक्ष में लगातार आगे बढ़ता चला जा रहा है.

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